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कà¥à¤·à¤¯à¤°à¥‹à¤— दिवस : टीबी से बचाव ही TB का बेहतर उपचार, जानें कैसे करें रोकथाम
टीबी (कà¥à¤·à¤¯à¤°à¥‹à¤—) à¤à¤• घातक संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• रोग है, जो कि माइकोबैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤® टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤²à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ जीवाणॠकी वजह से होती है। टीबी (कà¥à¤·à¤¯à¤°à¥‹à¤—) आमतौर पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° फेफड़ों पर हमला करता है, लेकिन यह फेफड़ों के अलावा शरीर के अनà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤—ों को à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है। यह रोग हवा के माधà¥à¤¯à¤® से फैलता है।
जब कà¥à¤·à¤¯à¤°à¥‹à¤— से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ खांसता, छींकता या बोलता है तो उसके साथ संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• डà¥à¤°à¥‰à¤ªà¤²à¥‡à¤Ÿ नà¥à¤¯à¥‚कà¥à¤²à¥€à¤†à¤ˆ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होता है, जो कि हवा के माधà¥à¤¯à¤® से किसी अनà¥à¤¯ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ कर सकता है। ये डà¥à¤°à¥‰à¤ªà¤²à¥‡à¤Ÿ नà¥à¤¯à¥‚कà¥à¤²à¥€à¤†à¤ˆ कई घंटों तक वातावरण में सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ रहते हैं। जब à¤à¤• सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ हवा में घà¥à¤²à¥‡ हà¥à¤ इन माइकोबैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤® टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤²à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ डà¥à¤°à¥‰à¤ªà¤²à¥‡à¤Ÿ नà¥à¤¯à¥‚कà¥à¤²à¥€à¤†à¤ˆ के संपरà¥à¤• में आता है तो वह इससे संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ हो सकता है।
कà¥à¤·à¤¯à¤°à¥‹à¤— सà¥à¤ªà¥à¤¤ और सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ अवसà¥à¤¥à¤¾ में होता है। सà¥à¤ªà¥à¤¤ अवसà¥à¤¥à¤¾ में संकà¥à¤°à¤®à¤£ तो होता है लेकिन टीबी का जीवाणॠनिषà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯ अवसà¥à¤¥à¤¾ में रहता है और कोई लकà¥à¤·à¤£ दिखाई नहीं देते हैं। अगर सà¥à¤ªà¥à¤¤ टीबी का मरीज अपना इलाज नहीं कराता है तो सà¥à¤ªà¥à¤¤ टीबी सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ टीबी में बदल सकती है। लेकिन सà¥à¤ªà¥à¤¤ टीबी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• और घातक नहीं है।
विशà¥à¤µ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संगठन के à¤à¤• अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° विशà¥à¤µ में 2 अरब से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लोगों को लेटेंट (सà¥à¤ªà¥à¤¤) टीबी संकà¥à¤°à¤®à¤£ है। सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ टीबी की बात की जाठतो इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में टीबी का जीवाणॠशरीर में सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ अवसà¥à¤¥à¤¾ में रहता है तथा यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को बीमार बनाती है। सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ टीबी का मरीज दूसरे सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ कर सकता है इसलिठसकà¥à¤°à¤¿à¤¯ टीबी के मरीज को अपने मà¥à¤‚ह पर मासà¥à¤• या कपड़ा लगाकर बात करनी चाहिठऔर मà¥à¤‚ह पर हाथ रखकर खांसना और छींकना चाहिà¤à¥¤
टीबी (कà¥à¤·à¤¯à¤°à¥‹à¤—) के लकà¥à¤·à¤£
1. लगातार 3 हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ से खांसी का आना और आगे à¤à¥€ जारी रहना।
2. खांसी के साथ खून का आना।
3. छाती में दरà¥à¤¦ और सांस का फूलना।
4. वजन का कम होना और जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ थकान महसूस होना।
5. शाम को बà¥à¤–ार का आना और ठंड लगना।
6. रात में पसीना आना।
टीबी (कà¥à¤·à¤¯à¤°à¥‹à¤—) के पà¥à¤°à¤•ार
1. पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ टीबी (फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸à¥€à¤¯ यकà¥à¤·à¥à¤®à¤¾)- अगर टीबी का जीवाणॠफेफड़ों को संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ करता है तो वह पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ टीबी (फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸à¥€à¤¯ यकà¥à¤·à¥à¤®à¤¾) कहलाता है। टीबी का बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ 90 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मामलों में फेफड़ों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ की बात की जाठतो आमतौर पर सीने में दरà¥à¤¦ और लंबे समय तक खांसी व बलगम होना शामिल हो सकते हैं। कà¤à¥€-कà¤à¥€ पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ टीबी से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ लोगों की खांसी के साथ थोड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में खून à¤à¥€ आ जाता है। लगà¤à¤— 25 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मामलों में किसी à¤à¥€ तरह के लकà¥à¤·à¤£ नहीं दिखाई देते हैं। बहà¥à¤¤ कम मामलों में संकà¥à¤°à¤®à¤£ फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸à¥€à¤¯ धमनी तक पहà¥à¤‚च सकता है जिसके कारण à¤à¤¾à¤°à¥€ रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ हो सकता है।
टीबी à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ बीमारी है और फेफड़ों के ऊपरी à¤à¤¾à¤—ों में वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• घाव पैदा कर सकती है। फेफड़ों के ऊपरी में होने वाली टीबी को कैविटरी टीबी कहा जाता है। फेफड़ों के ऊपरी à¤à¤¾à¤—ों में निचले à¤à¤¾à¤—ों की अपेकà¥à¤·à¤¾ तपेदिक संकà¥à¤°à¤®à¤£ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ की आशंका अधिक होती है। इसके अलावा टीबी का जीवाणॠकंठनली को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर लेरिंकà¥à¤¸ टीबी करता है।
2. à¤à¤•à¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾ पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ टीबी (इतर फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸à¥€à¤¯ यकà¥à¤·à¥à¤®à¤¾)- अगर टीबी का जीवाणॠफेफड़ों की जगह शरीर के अनà¥à¤¯ अंगों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है, तो इस पà¥à¤°à¤•ार की टीबी à¤à¤•à¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾ पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ टीबी (इतर फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸à¥€à¤¯ यकà¥à¤·à¥à¤®à¤¾) कहलाती है। à¤à¤•à¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾ पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ टीबी पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ टीबी के साथ à¤à¥€ हो सकती है। अधिकतर मामलों में संकà¥à¤°à¤®à¤£ फेफड़ों से बाहर à¤à¥€ फैल जाता है और शरीर के दूसरे अंगों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है जिसके कारण फेफड़ों के अलावा अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•ार के टीबी हो जाते हैं। फेफड़ों के अलावा दूसरे अंगों में होने वाली टीबी को सामूहिक रूप से à¤à¤•à¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾ पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ टीबी (इतर फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸à¥€à¤¯ यकà¥à¤·à¥à¤®à¤¾) के रूप में चिहà¥à¤¨à¤¿à¤¤ किया जाता है। à¤à¤•à¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾ पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ टीबी (इतर फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸à¥€à¤¯ यकà¥à¤·à¥à¤®à¤¾) अधिकतर कमजोर पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ वाले लोगों और छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में अधिक आम होता है।
à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ से पीड़ित लोगों में à¤à¤•à¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾ पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ टीबी (इतर फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸à¥€à¤¯ यकà¥à¤·à¥à¤®à¤¾) 50 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ से अधिक मामलों में पाया जाता है। à¤à¤•à¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾ पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ टीबी (इतर फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸à¥€à¤¯ यकà¥à¤·à¥à¤®à¤¾) को अंगों के हिसाब से नाम दिया गया है। अगर टीबी का जीवाणॠकेंदà¥à¤°à¥€à¤¯ तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है तो वह मैनिनà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ टीबी कहलाती है। लिमà¥à¤« नोड (लसिका पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€, गरà¥à¤¦à¤¨ की गंडमाला में) में होने वाली टीबी को लिमà¥à¤« नोड टीबी कहा जाता है।
पेराकारà¥à¤¡à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¸ तपेदिक में हृदय के आसपास की à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ (पेरीकारà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤®) पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होती है। पेराकारà¥à¤¡à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¸ तपेदिक में पेरीकारà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤® à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ और हृदय के बीच की जगह में फà¥à¤²à¥‚इड (तरल पदारà¥à¤¥) à¤à¤° जाता है। हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ व जोड़ों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करने वाली टीबी हडà¥à¤¡à¥€ व जोड़ों की टीबी कहलाती है। जननमूतà¥à¤°à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करने वाली टीबी जेनिटोयूरिनरी टीबी (मूतà¥à¤° जननांगी तपेदिक) कहलाती है। इसके अलावा à¤à¥€ माइकोबैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤® टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤²à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ शरीर के कई अंगों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार की à¤à¤•à¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾ पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ टीबी (इतर फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸à¥€à¤¯ यकà¥à¤·à¥à¤®à¤¾) करता है।
डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी के पà¥à¤°à¤•ार
1. मलà¥à¤Ÿà¥€ डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी- इस पà¥à¤°à¤•ार की डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी में फरà¥à¤¸à¥à¤Ÿ लाइन डà¥à¤°à¤—à¥à¤¸ का टीबी के जीवाणॠ(माइकोबैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤® टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤²à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸) पर कोई असर नहीं होता है। अगर टीबी का मरीज नियमित रूप से टीबी की दवाई नहीं लेता है या मरीज दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ जब गलत तरीके से टीबी की दवा ली जाती है या मरीज को गलत तरीके से दवा दी जाती है और या फिर टीबी का रोगी बीच में ही टीबी के कोरà¥à¤¸ को छोड़ देता है (टीबी के मामले में अगर 1 दिन à¤à¥€ दवा खानी छूट जाती है तब à¤à¥€ खतरा होता है) तो रोगी को मलà¥à¤Ÿà¥€ डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी हो सकती है। इसलिठटीबी के रोगी को डॉकà¥à¤Ÿà¤° के दिशा-निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶ में नियमित टीबी की दवाओं का सेवन करना चाहिà¤à¥¤ मलà¥à¤Ÿà¥€ डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी में फरà¥à¤¸à¥à¤Ÿ लाइन डà¥à¤°à¤—à¥à¤¸ आइसोनियाजिड और रिफामà¥à¤ªà¤¿à¤¸à¤¿à¤¨ जैसे दवाओं का मरीज पर कोई असर नहीं होता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आइसोनियाजिड और रिफामà¥à¤ªà¤¿à¤¸à¤¿à¤¨ का टीबी का जीवाणॠ(माइकोबैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤® टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤²à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸) पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§ करता है।
2. à¤à¤•à¥à¤¸à¤Ÿà¥‡à¤¨à¤¸à¤¿à¤µà¤²à¥€ डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी- इस पà¥à¤°à¤•ार की टीबी मलà¥à¤Ÿà¥€ डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ घातक होती है। à¤à¤•à¥à¤¸à¤Ÿà¥‡à¤¨à¤¸à¤¿à¤µà¤²à¥€ डà¥à¤°à¤— रेजीसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚ट टीबी में मलà¥à¤Ÿà¥€ डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी के उपचार के लिठपà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— होने वाली सेकंड लाइन डà¥à¤°à¤—à¥à¤¸ का टीबी का जीवाणॠपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§ करता है। à¤à¤•à¥à¤¸à¤Ÿà¥‡à¤¨à¤¸à¤¿à¤µà¤²à¥€ डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी में फरà¥à¤¸à¥à¤Ÿ लाइन डà¥à¤°à¤—à¥à¤¸ आइसोनियाजिड और रिफामà¥à¤ªà¤¿à¤¸à¤¿à¤¨ के साथ-साथ टीबी का जीवाणॠसेकंड लाइन डà¥à¤°à¤—à¥à¤¸ में कोई फà¥à¤²à¥‹à¤°à¥‹à¤•à¥à¤µà¤¿à¤¨à¥‹à¤²à¥‹à¤¨ डà¥à¤°à¤— (सीपà¥à¤°à¥‹à¤«à¥à¤²à¥‰à¤•à¥à¤¸à¤¾à¤¸à¤¿à¤¨, लेवोफà¥à¤²à¥‰à¤•à¥à¤¸à¤¾à¤¸à¤¿à¤¨ और मोकà¥à¤¸à¥€à¤«à¥à¤²à¥‹à¤•à¥à¤¸à¤¾à¤¸à¤¿à¤¨) और कम से कम à¤à¤• अनà¥à¤¯ इंजेकà¥à¤¶à¤¨ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दी जाने वाली डà¥à¤°à¤— (अमिकासिन, कैनामायसिन और कैपà¥à¤°à¥€à¤¯à¥‹à¤®à¤¾à¤¯à¤¸à¤¿à¤¨) का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§ करता है।
मलà¥à¤Ÿà¥€ डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी का रोगी दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अगर सेकंड लाइन डà¥à¤°à¤—à¥à¤¸ को à¤à¥€ ठीक तरह और समय से नहीं खाया या लिया जाता है तो à¤à¤•à¥à¤¸à¤Ÿà¥‡à¤¨à¤¸à¤¿à¤µà¤²à¥€ डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी की आशंका बॠजाती है। इस पà¥à¤°à¤•ार की टीबी में à¤à¤•à¥à¤¸à¤Ÿà¥‡à¤‚सिव थरà¥à¤¡ लाइन डà¥à¤°à¤—à¥à¤¸ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ 2 वरà¥à¤· से अधिक तक उपचार किया जाता है। लेकिन à¤à¤•à¥à¤¸à¤Ÿà¥‡à¤¨à¤¸à¤¿à¤µà¤²à¥€ डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी का उपचार सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€à¤ªà¥‚रà¥à¤£ है।
टीबी की जांच कैसे की जाती है?
टीबी के लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देने पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ रोगी को टीबी को जांचने के लिठकई तरह के टेसà¥à¤Ÿ कराने की सलाह दी जाती है, जो निमà¥à¤¨ है-
1. सà¥à¤ªà¥à¤Ÿà¤®/अनà¥à¤¯ फà¥à¤²à¥‚इड टेसà¥à¤Ÿ- इस टेसà¥à¤Ÿ में मरीज के बलगम/अनà¥à¤¯ फà¥à¤²à¥‚इड की लैब में पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग होने के बाद सà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¡ पर उसका सà¥à¤®à¥€à¤¯à¤° बनाया जाता है फिर उसकी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ फासà¥à¤Ÿ सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤‚निंग की जाती है। सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤‚निंग के बाद में सà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¡ पर टीबी के जीवाणॠकी माइकà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोप के जरिठपहचान की जाती है। माइकà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोप दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बलगम की जांच में 2-3 घंटे का समय लगता है। इस जांच के आधार पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° रोगी का इलाज शà¥à¤°à¥‚ कर देता है। लेकिन विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ कारणों की वजह से इसमें गड़बड़ी की आशंका होती है इसलिठसैंपल का पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग के समय पर ही लोà¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥€à¤¨ जेनसेन मीडिया पर कलà¥à¤šà¤° लगाया जाता है। इसके बाद सैंपल से इनोकà¥à¤¯à¥‚लेटेड कलà¥à¤šà¤° को इनकà¥à¤¯à¥‚बेटर में 37 डिगà¥à¤°à¥€ सेलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¸ पर रख देते हैं। इस जांच में 45 दिन या उससे अधिक समय लग सकता है।
2. सà¥à¤•िन टेसà¥à¤Ÿ (मोंटेकà¥à¤¸ टेसà¥à¤Ÿ)- इसमें इंजेकà¥à¤¶à¤¨ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दवाई सà¥à¤•िन में डाली जाती है जिससे कि 48-72 घंटे बाद पॉजीटिव रिजलà¥à¤Ÿ होने पर टीबी की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ होती है। लेकिन इस टेसà¥à¤Ÿ में बीसीजी टीका लगे हà¥à¤ और लेटेंट टीबी संकà¥à¤°à¤®à¤£ का à¤à¥€ पॉजीटिव रिजलà¥à¤Ÿ आ जाता है।
3. लाइन पà¥à¤°à¥‹à¤¬ असे- यह à¤à¤• रैपिड डà¥à¤°à¤— संवेदनशीलता टेसà¥à¤Ÿ है। इस टेसà¥à¤Ÿ के जरिठटीबी के जीवाणॠके फरà¥à¤¸à¥à¤Ÿ लाइन डà¥à¤°à¤—à¥à¤¸ (आइसोनियाजिड और रिफामà¥à¤ªà¤¿à¤¸à¤¿à¤¨) के पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ जेनेटिक मà¥à¤¯à¥‚टेशन की पहचान 1-2 दिनों में कर ली जाती है जिसकी वजह से मलà¥à¤Ÿà¥€ डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी की à¤à¥€ पहचान हो जाती है।
4. जीन à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ टेसà¥à¤Ÿ- नवीनतम तकनीक जीन à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ à¤à¤• कारà¥à¤Ÿà¤¿à¤°à¥‡à¤œ बेसà¥à¤¡ नà¥à¤¯à¥‚कà¥à¤²à¥€à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ à¤à¤®à¥à¤«à¥à¤²à¤¿à¤«à¤¿à¤•ेशन आधारित टेसà¥à¤Ÿ है। जीन à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ महज 2 घंटे में बलगम दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ टीबी का पता लगाया जा सकता है। साथ ही इस टेसà¥à¤Ÿ में जीवाणॠके फरà¥à¤¸à¥à¤Ÿ लाइन डà¥à¤°à¤— रिफामà¥à¤ªà¤¿à¤¸à¤¿à¤¨ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ जेनेटिक मà¥à¤¯à¥‚टेशन तक की à¤à¥€ पहचान कर ली जाती है जिसकी वजह से मलà¥à¤Ÿà¥€ डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी की à¤à¥€ पहचान हो जाती है।
टीबी का उपचार
टीबी के जीवाणà¥à¤“ं को मारने के लिठइसका उपचार करने के लिठà¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जाता है। टीबी के उपचार में सबसे अधिक इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² की जाने वाली 2 à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ आइसोनियाजिड और रिफामà¥à¤ªà¤¿à¤¸à¤¿à¤¨ हैं और उपचार कई महीनों तक चल सकता है।
सामानà¥à¤¯ टीबी का उपचार 6-9 महीने में किया जाता है। इन 6 महीनों में पहले 2 महीने आइसोनियाजिड, रिफामà¥à¤ªà¤¿à¤¸à¤¿à¤¨, इथामà¥à¤¬à¥à¤Ÿà¥‹à¤² और पायराजीनामाइड का उपयोग किया जाता है। इसके बाद इथामà¥à¤¬à¥à¤Ÿà¥‹à¤² और पैराजिनामाइड डà¥à¤°à¤—à¥à¤¸ को बंद कर दिया जाता है बाकी के 4-7 महीने आइसोनियाजिड और रिफामà¥à¤ªà¤¿à¤¸à¤¿à¤¨ का उपयोग किया जाता है। इसके साथ ही टीबी के इलाज के लिठसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤ªà¥à¤Ÿà¥‹à¤®à¤¾à¤‡à¤¸à¤¿à¤¨ इंजेकà¥à¤¶à¤¨ का à¤à¥€ उपयोग किया जाता है।
मलà¥à¤Ÿà¥€ डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी में फरà¥à¤¸à¥à¤Ÿ लाइन डà¥à¤°à¤—à¥à¤¸ का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ खतà¥à¤® हो जाता है इसके लिठसेकंड लाइन डà¥à¤°à¤—à¥à¤¸ का उपयोग किया जाता है जिसमें सीपà¥à¤°à¥‹à¤«à¥à¤²à¥‰à¤•à¥à¤¸à¤¾à¤¸à¤¿à¤¨, लेवोफà¥à¤²à¥‰à¤•à¥à¤¸à¤¾à¤¸à¤¿à¤¨, मोकà¥à¤¸à¥€à¤«à¥à¤²à¥‹à¤•à¥à¤¸à¤¾à¤¸à¤¿à¤¨, अमिकासिन, कैनामायसिन और कैपà¥à¤°à¥€à¤¯à¥‹à¤®à¤¾à¤¯à¤¸à¤¿à¤¨ इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ का उपयोग किया जाता है। मलà¥à¤Ÿà¥€ डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी का इलाज 2 साल तक चलता है। à¤à¤•à¥à¤¸à¤Ÿà¥‡à¤¨à¤¸à¤¿à¤µà¤²à¥€ डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी का इलाज डॉकà¥à¤Ÿà¤° की विशेष देखरेख में थरà¥à¤¡ लाइन डà¥à¤°à¤—à¥à¤¸ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किया जाता है। à¤à¤•à¥à¤¸à¤Ÿà¥‡à¤¨à¤¸à¤¿à¤µà¤²à¥€ डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी का इलाज 2 वरà¥à¤· से अधिक समय तक चलाया जाता है। à¤à¤•à¥à¤¸à¤Ÿà¥‡à¤¨à¤¸à¤¿à¤µà¤²à¥€ डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स टीबी अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€à¤ªà¥‚रà¥à¤£ है।
टीबी की रोकथाम
1. कà¥à¤·à¤¯à¤°à¥‹à¤— की रोकथाम और नियंतà¥à¤°à¤£ के लिठमà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से शिशà¥à¤“ं के बैसिलस कैलà¥à¤®à¥‡à¤Ÿ-गà¥à¤¯à¥‚रिन (बीसीजी) का टीकाकरण कराना चाहिà¤à¥¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यह 20% से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ संकà¥à¤°à¤®à¤£ होने का जोखिम कम करता है।
2. सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ मामलों के पता लगने पर उनका उचित उपचार किया जाना चाहिà¤à¥¤ टीबी रोग का उपचार जितना जलà¥à¤¦à¥€ शà¥à¤°à¥‚ होगा, उतनी जलà¥à¤¦à¥€ ही रोग से निदान मिलेगा।
3. टीबी रोग से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ रोगी को खांसते वकà¥à¤¤ मà¥à¤‚ह पर कपड़ा रखना चाहिठऔर à¤à¥€à¥œ-à¤à¤¾à¥œ वाली जगह पर या बाहर कहीं à¤à¥€ नहीं थूकना चाहिà¤à¥¤
4. साफ-सफाई के धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखने के साथ-साथ कà¥à¤› बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखने से à¤à¥€ टीबी के संकà¥à¤°à¤®à¤£ से बचा जा सकता है।
5. ताजे फल, सबà¥à¤œà¥€ और कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤¡, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, फैटयà¥à¤•à¥à¤¤ आहार का सेवन कर रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को बà¥à¤¾à¤¯à¤¾ जा सकता है। अगर वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की रोक पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ मजबूत होगी तो à¤à¥€ टीबी रोग से काफी हद तक बचा जा सकता है।
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